जानलेवा पॉलीट्रॉमा को मिली मात: अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई में 50 से अधिक डॉक्टरों और देखभालकर्ताओं ने एक असाधारण रिकवरी को संभव कर दिखाया
मरीज को लगभग एक सप्ताह तक आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. इस दौरान उसे किडनी संबंधी जटिलताएँ भी हुईं, जिनका सफलतापूर्वक इलाज किया गया.

POSTED BY : MRUNALI SAKPAL DATED ON 25/06/2026 (8850212023)
नवी मुंबई (NHI.COM) : 37 वर्षीय रँकिंग ऑफिसर, मर्चन्ट नेवी मृत्यु के मुख से निकलने के बाद आज अपने पैरों पर फिर से खड़ा हो गया है जिसे अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई के डॉक्टरों ने उनके द्वारा उपचारित सबसे जटिल पॉलीट्रॉमा मामलों में से एक बताया है. मरीज को कई फ्रैक्चर, कुचलने और पल्स-लेस दाहिना अंग, और एओर्टा (शरीर की प्रमुख ब्लड वेसेल)) के फटने जैसी गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उसकी कुछ ही मिनटों में मृत्यु हो सकती थी.
मरीज को पहले एक अन्य अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ से उसे अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुं रेफर कर दिया गया. जब वह यहाँ पहुँचा, तो उसकी स्थिति बहुत नाजुक थी, उसका ब्लड प्रेशर बेहद कम था और जान का खतरा बना हुआ था. डॉक्टरों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सर्जरी के लिए फायनांशियल औपचारिकताओं का इंतजार नहीं किया जा सकता, इसलिए इमरजेंसी रूम में पहुँचने के 45 मिनट के भीतर ही उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया.
जांच करने पर, डॉ. नितिन जगासीया, रीजनल डायरेक्टर, इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेस, अपोलो हॉस्पिटल्स, वेस्टर्न रीजन के नेतृत्व में ट्रॉमा टीम ने पाया कि मरीज के पेल्विस, फीमर, दोनों हाथों और जांघ की जगहों में फ्रैक्चर थे. उसकी दाहिनी भुजा बुरी तरह कुचल गई थी और कोई पल्स महसूस नहीं हो रही थी, जिससे ऐसी चिंता थी कि शायद उस अंग को बचाया ना जा सके. इन चोटों के साथ-साथ, सीटी एओर्टोग्राम से सबसे खतरनाक चोट का पता चला: शरीर की मेन ब्लड वेसेल फटने की बात ध्यान में आई, जो दुर्घटना में शरीर को लगे तीव्र झटके के कारण हुआ था. ऑर्थोपेडिक्स की तीन सदस्यीय टीम, जिसमें अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई के कंसल्टेंट ट्रॉमा, ऑर्थोपेडिक और जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. समीर चौधरी और उनकी टीम शामिल थी, को लगभग ढाई घंटे तक फ्रैक्चर को स्टेबिलाइज़ करने और पेल्विक अस्थिरता को नियंत्रित करने में लगे. साथ ही साथ, अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई के कंसल्टेंट प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ. चारुदत्त चौधरी और उनकी टीम ने कुचले हुए दाहिने हाथ को बचाने के लिए कड़ी मेहनत की. साथ ही, अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. बृजेश कुमार कुंवर के नेतृत्व में कार्डियोवस्कुलर टीम ने आपातकालीन एओर्टिक रिपेयर की योजना बनाई और मरीज के पहुँचने से पहले ही सही आकार का स्टेंट तैयार रखा.
मरीज को लगभग एक सप्ताह तक आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. इस दौरान उसे किडनी संबंधी जटिलताएँ भी हुईं, जिनका सफलतापूर्वक इलाज किया गया. बाद के दिनों में, उसका उपचार वैक्यूम-एसीस्टेड क्लोजर (वीएसी) थेरेपी, बार-बार ड्रेसिंग बदलने, पेल्विस और फीमर में प्लेट लगाने की इंटरनल फिक्सेशन सर्जरी और सॉफ्ट-टिशू रिकंस्ट्रक्शन एवं घाव को भरने के लिए प्लास्टिक सर्जरी पर केंद्रित रहा.
तीसरे सप्ताह तक, मरीज को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया, जहाँ फिजियोथेरेपी टीम ने रिहैबिलिटेशन शुरू किया. चोट के लगभग छह सप्ताह बाद उसे छुट्टी दे दी गई और वह चलने फिरने के लिए व्हीलचेयर का उपयोग करने में सक्षम था. सात सप्ताह के भीतर, उसने खड़ा होने का प्रयास शुरू कर दिया और पूर्ण रिकवरी की दिशा में फिजियोथेरेपी अभी भी जारी है.
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए डॉ. समीर चौधरी ने कहा:
“यह हमारे द्वारा संभाले गए सबसे चुनौतीपूर्ण पॉलीट्रॉमा मामलों में से एक था. मरीज कई फ्रैक्चर, पेल्विक इनस्टेबिलिटी और बुरी तरह कुचले हुए दाहिने हाथ के साथ आया था, जिसमें कोई पल्स नहीं थी, जिससे अंग को बचाना एक बड़ी चिंता थी. ट्रॉमा केयर में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है और हर निर्णय तेजी से और सटीकता के साथ लेना पड़ता है. उपचार के दौरान, कई स्पेशलिस्टों ने फ्रैक्चर को स्थिर करने, अंग के कार्य को सुरक्षित करने और मरीज की रिकवरी में सहयोग करने के लिए करीबी से तालमेल के साथ काम किया. उसे लगभग मृत स्थिति से वापस सामान्य स्थिति में आते देखना अत्यंत संतोषजनक है और यह समय पर किए गए इंटरवेंशन और मल्टीडिसिप्लीनरी टीम वर्क के महत्व को उजागर करता है.”
इस उल्लेखनीय रिकवरी पर बोलते हुए, डॉ. किरण शिंगोटे, सीओओ और यूनिट हेड, अपोलो हॉस्पिटल्स, नवी मुंबई ने कहा:
“यह मामला इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि समन्वित, मल्टीडिसिप्लीनरी देखभाल से क्या हासिल किया जा सकता है. 50 से अधिक डॉक्टरों, नर्सों और देखभालकर्ताओं का विभिन्न स्पेश्यालिटीज़ से एक साथ आना, एड्वांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर और चौबीसों घंटे उपलब्ध कुशल विशेषज्ञों की मदद से, एक जानलेवा ट्रॉमा को आशा और रिकवरी की कहानी में बदल दिया. ऐसे परिणाम यह दर्शाते हैं कि जब सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब हम विश्व स्तरीय देखभाल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
अपोलो हॉस्पिटल्स के बारे में
अपोलो ने हेल्थकेयर में तब क्रांति ला दी जब डॉ. प्रताप रेड्डी ने 1983 में चेन्नई में पहला हॉस्पिटल खोला। आज, अपोलो दुनिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म है, जिसके 76 हॉस्पिटल्स में 10,400 से ज़्यादा बेड, 7,113 से ज़्यादा फार्मेसी, 308 क्लिनिक, 2,457 डायग्नोस्टिक सेंटर्स, और 800 से ज़्यादा टेलीमेडिसिन सेंटर हैं। यह दुनिया के अग्रणी कार्डिएक सेंटर्स में से एक है, जिसने 3,00,000 से अधिक एंजियोप्लास्टी और 2,00,000 सर्जरियाँ की हैं। अपोलो अनुसंधान और इनोवेशन में निवेश करना जारी रखे हुए है ताकि सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी, उपकरण और उपचार प्रोटोकॉल व्यवहार में लाए जा सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज़ों को दुनिया की सबसे अच्छी देखभाल मिल सके। अपोलो परिवार के 1,20,000 सदस्य बेहतरीन देखभाल देने और दुनिया को पहले से बेहतर बनाने के लिए समर्पित हैं।


