विभाजन से परे संवाद: देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच फिल्म जगत, इन्फ्लुएंसर्स और मीडिया पत्रकार शांति के संदेश हेतु मैत्रेय दादाश्रीजी की ओर अग्रसर
ज़ोर देकर कहा कि अगर समाज आज अपने युवाओं का उचित मार्गदर्शन करने में नाकाम रहता है, तो इसके नतीजे किसी के भी नियंत्रण से बहुत आगे जा सकते हैं।

POSTED BY : MRUNALI SAKPAL DATED ON 24/07/2026 (8850212023)
मुंबई (NHI.COM) : ऐसे समय में जब देश में अशांति और विरोधी विचार बढ़ रहे है, फिल्म इंडस्ट्री के लोग, इन्फ्लुएंसर, मीडिया पत्रकार और अन्य लोगों ने मैत्रीबोध परिवार से संपर्क किया है। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक संस्था है जो प्रेम और शांति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। इससे देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर सार्थक बातचीत और आगे बढ़ने का शांतिपूर्ण समाधान खोजने में सहायता मिली है।
इस वार्ता का मार्गदर्शन दूरदर्शी मैत्रेय दादाश्रीजी द्वारा किया गया और इस वार्ता में प्रसिद्ध कलाकार स्मिता जयकर, राज अरुण, काजल अग्रवाल, मकरंद देशपांडे, कुनिका सदानंद, आदिनाथ कोठरे , स्नेह झला, आर जे मलिश्का, मानव मंगलानी; के साथ कुछ जाने माने इन्फ्लूएंसर्स, मीडिया पत्रकार और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के जाने माने सदस्य मौजूद थे।
मैत्रीबोध परिवार के संस्थापक-दूरदर्शी मैत्रेय दादाश्रीजी के मार्गदर्शन में, बातचीत में मौजूदा संकट की असली वजहों को समझने पर ध्यान दिया गया, साथ ही आध्यात्मिक और व्यावहारिक दोनों तरह के समाधान दिए गए जो समाज को विभाजन के बजाय सद्भावना की ओर ले जा सकते हैं। बातचीत शुरू करते हुए, मैत्रेय दादाश्रीजी ने शांति स्थापना के लिए मैत्रीबोध परिवार की प्रतिबद्धता के लिए फिर से आश्वस्त किया। “जहां भी अशांति होगी, मैत्रीबोध परिवार वहां होगा। हम शांति के पक्षधर हैं। हम शांति चुनते हैं। शांति का मूल्य तभी समझ में आता है जब अशांति हो। आज हमारे देश में जो कुछ भी हो रहा है, वह बहुत चिंता की बात है। हमारी ज़िम्मेदारी सिर्फ प्रतिक्रिया देना नहीं है, बल्कि सद्भावना वापस लाने के समाधान ढूंढना है।”
युवाओं द्वारा जो आंदोलन किया जा रहा है उस पर चर्चा करते हुए, मैत्रेय दादाश्रीजी ने देखा कि आंदोलन सही इरादों के साथ शुरू हुआ था पर धीरे धीरे सकारात्मक नेतृत्व की कमी होने के कारण सही दिशा भटक गया है। “शुरुआती इरादे शुद्ध थे। लेकिन जैसे ही सही मार्गदर्शन नहीं मिला, असली मकसद पीछे रह गया। लोग कारण पर बात करने के बजाय हिंसा पर बात करने लगे।” उन्होंने इस बात को जोर देकर कहा, “आज के युवा में बहुत अधिक उर्जा है, पर उस ऊर्जा को अनुभवी मार्गदर्शन और अनुशासित दिशा चाहिए। युवाओं को रुक कर, दोबारा से सोचना चाहिए और फिर आगे बढ़ना चाहिए। राष्ट्र का भविष्य निर्माण शांति से होगी ना कि अराजकता से।” उन्होंने यह भी कहा कि केवल आंदोलन अंतिम समाधान नहीं है। बल्कि समाज को सही शोध, योजना और उत्पादक कार्य करके सक्रिय सहयोग करना चाहिए। “मैत्रीबोध परिवार समस्याओं पर रिसर्च करता है, उनको गहराई से समझता है, व्यवहारिक फ्रेमवर्क बनाता है और फिर उन्हें लागू करने की दिशा में काम करता है। असली परिवर्तन सिर्फ़ मांगों से नहीं, बल्कि समाधानों से आता है।” उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर समाज आज अपने युवाओं का उचित मार्गदर्शन करने में नाकाम रहता है, तो इसके नतीजे किसी के भी नियंत्रण से बहुत आगे जा सकते हैं।

सरकार के बारे में बात करते हुए, मैत्रेय दादाश्रीजी ने माना कि जनता में अशांति के समय अधिकारियों से समय पर बातचीत ज़रूरी है। “सरकार को जल्द से जल्द नागरिकों से बातचीत करनी चाहिए। देर से बातचीत से अनिश्चितता उत्पन्न होती है, और अनिश्चितता से तनाव उत्पन्न होता है। पारदर्शी बातचीत से विश्वास बनता है। इससे जुड़े सभी लोगों के बीच, अगर शुरू में ही खुल कर बातचीत होती, तो मौजूदा हालात को काफी हद तक रोका जा सकता था। बातचीत से उपचार मुमकिन होती है।”
“कानून व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, पर ऐसा करते हुए, हर व्यक्ति का गौरव संरक्षित रहना चाहिए, ख़ास कर महिलाओं के प्रति। पुलिस को युवाओं को अपने बच्चों की तरह देखना चाहिए, और युवाओं को पुलिस को सम्मान देना चाहिए जैसा वे अपने बड़ों को देते हैं। किसी भी तरफ से की गई हिंसा समाज को कमजोर बनाती है।”
“हमारी संस्कृति ने हमें कभी भी लोगों में विभाजन करना, दूसरों से घृणा करना या हिंसा का मार्ग अपनाना नहीं सिखाया है। हर व्यक्ति को लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है, पर हिंसा बदलाव की भाषा नहीं हो सकती है।” संस्था के पद को स्पष्ट करते हुए, मैत्रेय दादाश्रीजी ने कहा कि मैत्रीबोध परिवार राजनैतिक संबंध, विचारधाराओं और धार्मिक पहचान से ऊपर है। “हम किसी भी राजनैतिक पार्टी, विचारधारा या धर्म के साथ नहीं है। हम एक विश्व, एक परिवार और एक भारत हम भारत की धरना के साथ खड़े हैं। कोई भी चीज जो हमें एक दूसरे से अलग करती है वह हमारा मार्ग नहीं हो सकती है।”
मैत्रीबोध परिवार और मैत्रेय दादाश्रीजी ने आश्वस्त किया है कि जब भी समाज में उथल पुथल होगी, वह हमेशा संवाद, उपचार और उत्पादक कार्य के लिए एक सेतु का काम करेंगे। हर जगह शांति स्थापित हो!




