एम.के. सन्स फाइन ज्वेर्ल्स लिमिटेड का आईपीओ बुधवार, 28 अक्तूबर, 2026 से खुलेगा
इस ऑफर में 13,600,000 इक्विटी शेयरों का 'फ्रेश इश्यू' (नए शेयर जारी करना) और प्रमोटर शेयरहोल्डर, रामचंद मुरलीधर रायमलानी द्वारा 3,400,000 इक्विटी शेयरों का 'ऑफर फॉर सेल' (बिक्री के लिए पेशकश) शामिल है।

POSTED BY : MRUNALI SAKPAL DATED ON : 23/10/2026 (8850212023) 📞
•प्राइस बैंड 10 रुपये फेस वैल्यू वाले प्रति इक्विटी शेयर के लिए 153 से 162 रुपये तय किया गया है
•एंकर इन्वेस्टर बिडिंग की तारीख – मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
•बिड/ऑफर खुलने की तारीख – बुधवार, 28 अक्टूबर 2026; बिड/ऑफर बंद होने की तारीख – शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
•कम से कम 91 इक्विटी शेयरों के लिए बोली लगाई जा सकती है और उसके बाद 91 के गुणकों में बोली लगाई जा सकती है
•रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस का लिंक: https://www.afsl.co.in/pdfnew/Red%20Herring%20Prospectus.pdf
Mumbai : (NHI) एम.के. सन्स फाइन ज्वेल्स लिमिटेड (‘कंपनी’ या ‘एमके सन्स’) ने अपने इक्विटी शेयरों के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की घोषणा की। एम.के. सन्स फाइन ज्वेल्स लिमिटेड रिटेल पर केंद्रित एक ज्वेलरी कंपनी है। यह 2012 से अपने खुद के रिटेल शोरूम के जरिए सोने, हीरे और क्यूबिक ज़िरकोनिया (CZ) की विभिन्न प्रकार की ज्वेलरी की मार्केटिंग और बिक्री कर रही है। वर्तमान में, कंपनी मुंबई में तीन और अहमदाबाद में दो शोरूम चलाती है। 30 जून, 2026 तक, इन पांचों शोरूम का कुल ऑपरेशनल एरिया 6,513 वर्ग फुट है।

प्राप्त शुद्ध राशि का उपयोग महाराष्ट्र में 1 नया शोरूम खोलने और गुजरात में मौजूदा शोरूम का विस्तार करने के लिए इन्वेंट्री लागत को पूरा करने, कंपनी द्वारा लिए गए कुछ कर्जों का पूरा या आंशिक रूप से पुनर्भुगतान (repayment) या पूर्व-भुगतान (pre-payment) करने और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किए जाने का प्रस्ताव है। कंपनी के पास आभूषणों का एक विविध पोर्टफोलियो है, जिसमें 19,442 से अधिक स्टॉक कीपिंग यूनिट्स (SKUs) शामिल हैं। इसकी मूल्य निर्धारण रणनीति को इस तरह तैयार किया गया है कि यह ग्राहकों के एक बड़े वर्ग की जरूरतों को पूरा कर सके। यहाz आभूषण लगभग 11,000 रुपये की शुरुआती कीमत से लेकर उच्च मूल्य वाले प्रीमियम आभूषणों तक उपलब्ध हैं।
कंपनी का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में 2,173.23 मिलियन रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 5,387.36 मिलियन रुपये हो गया है, जो 57.45% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) को दर्शाता है। टैक्स के बाद मुनाफा (शुद्द फायदा) वित्त वर्ष 2024 में 81.65 मिलियन से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 517.99 मिलियन रुपये हो गया है, जो 151.87% की सीएजीआर को दर्शाता है। इस ‘रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस’ के माध्यम से पेश किए जाने वाले इक्विटी शेयरों को स्टॉक एक्सचेंजों – बीएसई लिमिटेड (“BSE”) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (“NSE”, जिन्हें सामूहिक रूप से “स्टॉक एक्सचेंज” कहा गया है) पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। इस ऑफर के लिए, ‘डेजिग्नेटेड स्टॉक एक्सचेंज’ (निर्धारित स्टॉक एक्सचेंज) एनएसई होगा।
आर्यमान फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड इस ऑफर के एकमात्र बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं और बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड रजिस्ट्रार हैं। यह ऑफर SCRR के नियम 19(2)(b) और सेबी ICDR रेगुलेशंस के रेगुलेशन 31 के तहत दिया जा रहा है। यह ऑफर ‘बुक बिल्डिंग प्रोसेस’ के जरिए लाया जा रहा है और सेबी ICDR रेगुलेशंस के रेगुलेशन 6(1) का पालन करता है। इसके तहत, सेबी ICDR रेगुलेशंस के रेगुलेशन 32(1) के अनुसार, ऑफर का अधिकतम 50% हिस्सा ‘क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स’ (QIBs) को आनुपातिक आधार पर आवंटित किया जा सकता है (इसे ‘QIB पोर्शन’ कहा जाएगा)। हालांकि, हमारी कंपनी बीआरएलएम के साथ मिलकर, सेबी ICDR रेगुलेशंस के अनुसार, क्यूआईबी पोर्शन का 60% तक हिस्सा ‘एंकर इन्वेस्टर्स’ को अपनी मर्जी से आवंटित कर सकती है (इसे ‘एंकर इन्वेस्टर पोर्शन’ कहा जाएगा)। इस एंकर इन्वेस्टर पोर्शन का 40% हिस्सा इस प्रकार आरक्षित रहेगा: (i) 33.33% हिस्सा घरेलू म्यूचुअल फंड्स के लिए; और (ii) 6.67% हिस्सा जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए। यह तब लागू होगा जब इन घरेलू म्यूचुअल फंड्स, जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स की ओर से ‘एंकर इन्वेस्टर एलोकेशन प्राइस’ (या उससे अधिक कीमत) पर वैध बोलियां प्राप्त हों। यदि ऊपर (ii) में बताई गई जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स की श्रेणी में ‘अंडर-सब्सक्रिप्शन’ (कम बोलियां आना) होता है, तो वह हिस्सा सेबी ICDR रेगुलेशंस के अनुसार घरेलू म्यूचुअल फंड्स को आवंटित किया जा सकता है। यदि एंकर इन्वेस्टर पोर्शन में अंडर-सब्सक्रिप्शन होता है या कोई आवंटन नहीं हो पाता है, तो बचे हुए इक्विटी शेयर बाकी बचे क्यूआईबी पोर्शन (जिसे ‘नेट QIB पोर्शन’ कहा जाएगा) में जोड़ दिए जाएंगे। इसके अलावा, ‘नेट क्यूआईबी पोर्शन’ का 5% हिस्सा केवल म्यूचुअल फंड्स को आनुपातिक आधार पर आवंटित किया जाएगा। बाकी बचा हुआ ‘नेट क्यूआईबी पोर्शन’, म्यूचुअल फंड्स सहित सभी क्यूआईबी बिडर्स (एंकर इन्वेस्टर्स को छोड़कर) को आनुपातिक आधार पर आवंटित किया जाएगा, बशर्ते ‘ऑफर प्राइस’ (या उससे अधिक कीमत) पर वैध बोलियां प्राप्त हों। हालाँकि, यदि म्यूचुअल फंड की कुल मांग क्यूआईबी हिस्से के 5% से कम है, तो म्यूचुअल फंड हिस्से में आवंटन के लिए उपलब्ध बचे हुए इक्विटी शेयरों को शेष क्यूआईबी हिस्से में जोड़ दिया जाएगा, ताकि उन्हें QIBs के बीच आनुपातिक रूप से आवंटित किया जा सके।
इसके अलावा, ऑफर का कम से कम 15% हिस्सा नॉन-इंस्टीट्यूशनल बिडर्स (गैर-संस्थागत बोलीदाताओं) के लिए उपलब्ध होगा। इसमें से (a) एक-तिहाई हिस्सा उन आवेदकों के लिए आरक्षित होगा, जिनकी आवेदन राशि 0.20 मिलियन रुपये से अधिक और 1.00 मिलियन रुपये तक है और (b) दो-तिहाई हिस्सा उन आवेदकों के लिए आरक्षित होगा, जिनकी आवेदन राशि ₹1.00 मिलियन से अधिक है। यदि इनमें से किसी भी उप-श्रेणी में कोई हिस्सा बिना आवेदन के रह जाता है, तो उसे नॉन-इंस्टीट्यूशनल बिडर्स की दूसरी उप-श्रेणी के आवेदकों को आवंटित किया जा सकता है। साथ ही, सेबी ICDR रेगुलेशंस के अनुसार, ऑफर का कम से कम 35% हिस्सा रिटेल इंडिविजुअल बिडर्स (“RIBs”) के लिए उपलब्ध होगा (“रिटेल पोर्शन”), बशर्ते उनकी ओर से ऑफर प्राइस या उससे अधिक कीमत पर वैध बोलियां प्राप्त हों।
इसके अतिरिक्त, सभी संभावित बिडर्स (एंकर इन्वेस्टर्स को छोड़कर) के लिए ‘एप्लीकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड अमाउंट’ (“ASBA”) प्रक्रिया का उपयोग करना अनिवार्य है। इसके लिए उन्हें अपने बैंक खातों का विवरण (यूपीआई मैकेनिज्म का उपयोग करने वाले बिडर्स के लिए यूपीआई आईडी सहित) देना होगा। इस प्रक्रिया के तहत, ऑफर में भाग लेने के लिए बिड की राशि को SCSBs या स्पॉन्सर बैंकों (जो भी लागू हो) द्वारा संबंधित बैंक खाते में ब्लॉक कर दिया जाएगा। एंकर इन्वेस्टर्स को ASBA प्रक्रिया के माध्यम से ऑफर के ‘एंकर इन्वेस्टर पोर्शन’ में भाग लेने की अनुमति नहीं है।




