पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी ने 1,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी के पास यूडीआरएचपी-I दाखिल किया
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का यूजर रिटेंशन 99% रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025 में यह 87.98% और वित्त वर्ष 2024 में 98.48% था।

POSTED BY : MRUNALI SAKPAL DATED ON : 16/10/2026 (8850212023)
पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी लिमिटेड, जो डिजिटल गिफ्टिंग, कंज्यूमर स्पेंड मैनेजमेंट और रिवॉर्ड्स एवं लॉयल्टी प्लेटफॉर्म के कारोबार से जुड़ी फिनटेक कंपनी है, ने 1,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस-I (यूडीआरएचपी-I) दाखिल किया है।
प्रस्तावित आईपीओ में कंपनी 698 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी करेगी, जबकि 302 करोड़ रुपये तक के शेयर ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के जरिए बेचे जाएंगे। इस तरह आईपीओ का कुल आकार 1,000 करोड़ रुपये तक होगा। हर इक्विटी शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। ओएफएस में शेयर बेचने वाले प्रमोटर शेयरधारक सोनिया पंकज आशर और राहुल आनंद हैं। दोनों 151-151 करोड़ रुपये तक के शेयर बेचेंगे। कंपनी 139.60 करोड़ रुपये तक का प्री-आईपीओ प्लेसमेंट भी कर सकती है। ऐसा होने पर लागू नियमों के तहत इससे जुटाई गई रकम नए इश्यू के आकार से घटा दी जाएगी।
नए इश्यू से मिलने वाली शुद्ध रकम में से 355 करोड़ रुपये नए ग्राहक जोड़ने, मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने और ब्रांड व कारोबार के प्रचार से जुड़ी पहलों पर खर्च करने का प्रस्ताव है। इसी तरह 94 करोड़ रुपये टेक्नोलॉजी के विकास, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर सेवाओं और आईटी एसेट्स पर और 38 करोड़ रुपये दफ्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा कुछ रकम सामान्य कॉरपोरेट कामों में इस्तेमाल करने की योजना है।
वर्ष 2016 में शुरू हुई पैरामोटर डिजिटल प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआई), डिजिटल गिफ्टिंग, रिवॉर्ड्स एंड लॉयल्टी सॉल्यूशंस और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी का स्पेंडप्रो प्लेटफॉर्म प्रीपेड कार्ड इस्तेमाल करने वालों को अपने खर्च संभालने में मदद करता है। yayyy.shop गिफ्ट कार्ड और रिवॉर्ड पॉइंट्स का डिजिटल मार्केटप्लेस है। रिवॉर्डऑन कंपनियों के लिए डिजिटल रिवॉर्ड्स और इंसेंटिव का ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिस पर पूरा काम एक ही जगह हो जाता है। वहीं डेवस्टैक कंपनी का टेक्निकल और प्लेटफॉर्म डेवलपमेंट सेवाओं का कारोबार है, जो कंपनियों की जरूरत के मुताबिक एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार करता है।
कंपनी बैंकों और आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त जारीकर्ताओं के प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए प्रोग्राम मैनेजर, बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट और डिस्ट्रीब्यूशन एजेंट की भूमिका निभाती है। साथ ही वह मर्चेंट्स के जारी किए गए नॉन-रीलोडेबल ब्रांड गिफ्ट कार्ड का डिस्ट्रीब्यूशन भी करती है। कंपनी के ग्राहकों में पीपीआई जारी करने वाले संस्थान, गिफ्ट कार्ड एग्रीगेटर, रिवॉर्ड्स और लॉयल्टी प्रोग्राम चलाने वाली कंपनियां और डेवस्टैक कारोबार के क्लाइंट शामिल हैं।
रिवॉर्ड्स एंड लॉयल्टी कारोबार के तहत उपभोक्ता कंपनी के डिजिटल मार्केटप्लेस पर रिवॉर्ड पॉइंट्स, गिफ्ट कार्ड और प्रीपेड कार्ड खरीद और रिडीम कर सकते हैं। रिवॉर्डऑन के जरिए कंपनियां रिवॉर्ड पॉइंट्स का प्रोग्राम बना सकती हैं, उसे चला सकती हैं और लाभार्थियों तक पॉइंट्स पहुंचा सकती हैं। लाभार्थी ये पॉइंट्स गिफ्ट कार्ड और प्रीपेड कार्ड के खास कैटलॉग से रिडीम कर सकते हैं। स्पेंडप्रो प्रीपेड कार्ड यूजर्स को अपने खर्च का हिसाब रखने में मदद करता है।
कंपनी आगे की तरक्की के लिए अपने सभी प्रोडक्ट्स पर यूजर्स बढ़ाने, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करने, नए प्रोडक्ट और सेवाएं लाने, कारोबारी साझेदारियां और गठजोड़ बढ़ाने और पैरामोटर ब्रांड को मजबूत करने पर ध्यान देगी।
कंपनी की कमान एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन और होल-टाइम डायरेक्टर सोनिया पंकज आशर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल आनंद के हाथ में है। सोनिया आशर को बैंकिंग और पेमेंट्स में 24 साल से ज्यादा का अनुभव है। वे ग्लोबल पेमेंट्स एशिया-पैसिफिक इंडिया और एचएसबीसी में अहम पदों पर रह चुकी हैं। राहुल आनंद के पास 17 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें मैनेजमेंट कंसल्टिंग, ई-कॉमर्स और डिजिटल पेमेंट्स का काम शामिल है।
कंपनी की कारोबारी ताकत में प्रीपेड कार्ड, गिफ्टिंग और रिवॉर्ड्स को जोड़ने वाला डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर डिजिटल इकोसिस्टम है। लेनदेन करने वाले रिटेल यूजर्स की लगातार बढ़ती संख्या और उन्हें जोड़े रखने की ऊंची दर भी उसकी ताकत है। इसके अलावा बड़े पैमाने पर एंटरप्राइज सॉल्यूशंस दे सकने वाले टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और साझेदारियां बनाने व उन्हें निभाने की क्षमता भी कंपनी के पक्ष में जाती है।
पैरामोटर डिजिटल की कंसॉलिडेटेड कामकाजी आय (रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस) वित्त वर्ष 2024 के 33.08 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में स्टैंडअलोन आधार पर 112.08 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2026 में कंसॉलिडेटेड आधार पर यह 603.15 करोड़ रुपये पहुंच गई। संबंधित स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड वित्तीय विवरणों के मुताबिक कंपनी का कर के बाद मुनाफा (पीएटी) वित्त वर्ष 2024 के 4.94 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 24.51 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 59.14 करोड़ रुपये हो गया।
30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में कंपनी की कंसॉलिडेटेड कामकाजी आय 252.77 करोड़ रुपये और पीएटी 23.81 करोड़ रुपये रहा। इस तिमाही में एबिटा 32.62 करोड़ रुपये और एबिटा मार्जिन 12.90% रहा। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी के पास लेनदेन करने वाले 15.8 लाख यूजर्स थे और यूजर रिटेंशन रेट 99% रहा।
नए कारोबारी वर्टिकल आने के साथ कंपनी की आय का स्वरूप भी बदला है। रिवॉर्ड्स एंड लॉयल्टी कारोबार वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में शुरू हुआ था। उसी साल ग्राहकों के साथ हुए अनुबंधों से मिली आय में इसका योगदान 414.23 करोड़ रुपये यानी 68.68% रहा। पीपीआई प्रोग्राम मैनेजमेंट एंड डिस्ट्रीब्यूशन कारोबार से 154.16 करोड़ रुपये यानी 25.56% और डेवस्टैक से 34.76 करोड़ रुपये यानी 5.76% आय हुई। ये आंकड़े प्रॉस्पेक्टस में बताए गए आय दर्ज करने के अलग-अलग तरीकों पर आधारित हैं। रिवॉर्ड्स एंड लॉयल्टी और डेवस्टैक की आय ग्रॉस आधार पर दर्ज की गई है, जबकि पीपीआई प्रोग्राम फीस नेट आधार पर। लेनदेन करने वाले कुल यूजर्स वित्त वर्ष 2024 में 18,248 और वित्त वर्ष 2025 में 43,269 थे, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 15.8 लाख हो गए।
प्रॉस्पेक्टस में दी गई फ्रॉस्ट एंड सुलिवन (एफएंडएस) की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलेंडर वर्ष 2025 में भारत में प्रीपेड लेनदेन 200 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिनकी कुल वैल्यू 70,090 करोड़ रुपये होगी। 2030 तक यह बाजार 450 करोड़ लेनदेन और 1,02,890 करोड़ रुपये की वैल्यू तक पहुंच सकता है। 2025 में भारत का डिजिटल गिफ्ट कार्ड बाजार करीब 1,510 करोड़ डॉलर का था और 2025 से 2030 के बीच इसके 17.4% की सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने का अनुमान है।
भारत का रिवॉर्ड्स और लॉयल्टी बाजार 2025 के 509 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 तक 1,057 करोड़ डॉलर का हो जाने का अनुमान है, यानी 15.8% की सीएजीआर। वहीं देश का फिनटेक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट बाजार 2025 के 53 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2030 तक 215 करोड़ डॉलर का हो सकता है। ये आंकड़े डिजिटल वित्तीय सेवाओं और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स में बढ़ते मौकों की ओर इशारा करते हैं।
मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स लिमिटेड और इक्विरस कैपिटल लिमिटेड इस इश्यू के बुक रनिंग लीड मैनेजर (बीआरएलएम) हैं। एमयूएफजी इनटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इश्यू की रजिस्ट्रार है।




