नींद का खामोश संकट: अपोलो के एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि स्लीप एपनिया के 80-90% मामलों का निदान ही नहीं हो पाता
एक समर्पित स्लीप डिसॉर्डर क्लिनिक का आरंभ करते समय अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने नागरिकों से जोर से खर्राटे लेने और दिन में अत्यधिक नींद आने जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया है

POSTED BY : MRUNALI SAKPAL DATED ON 16/07/2026 (8850212023)
नवी मुंबई (NHI.COM) : मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में नींद संबंधी विकार सार्वजनिक स्वास्थ्य की सबसे उपेक्षित चिंताओं में से एक बनकर उभर रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मुंबई और नवी मुंबई में लगभग 45-50 लाख लोग नींद में सांस लेने संबंधी विकार से पीड़ित हो सकते हैं जबकि 80-90% मामलों का निदान नहीं हो पाता, क्योंकि जोर से खर्राटे लेने और दिन में अत्यधिक थकान महसूस होने जैसे लक्षणों को अक्सर सामान्य मानकर नज़रअंदाज कर दिया जाता है।
अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई के एक्सपर्ट्स ने मरीज़ जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए नींद संबंधी विकारों के बढ़ते बोझ पर प्रकाश डाला और जन जागरूकता तथा समय पर उपचार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
एक्सपर्ट्स ने बताया कि यह समस्या कॉर्पोरेट्स के कार्यरत प्रोफेशनल्स में विशेष रूप से अधिक है, जहाँ की लंबी कार्य अवधियां, अनियमित नींद का समय, तनाव और आरामतलब जीवनशैली ने नींद संबंधी विकारों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। मध्यम आयु वर्ग के हर पांच कामकाजी पुरुषों और महिलाओं में से एक को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) का उच्च जोखिम होने का अनुमान लगाया गया है।
अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई में पल्मोनोलॉजी विभाग की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. जयलक्ष्मी टी. के. ने कहा, “खर्राटों को कभी भी एक नुकसानरहित आदत समझकर टालना नहीं करना चाहिए।” “कई व्यक्तियों में, यह शरीर की एक चेतावनी का संकेत है कि नींद के दौरान सांस बार-बार रुक रही है, जिससे मस्तिष्क और हृदय को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। उपचार नहीं किए जाने पर, स्लीप एपनिया रेजिस्टेंट हाइपरटेंशन, दिल का दौरा, स्ट्रोक, डायबिटीज़ और अचानक होनेवाली कार्डियक घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।”
मेडिकल एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि स्लीप एपनिया का उपचार नहीं होने पर प्रमुख हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम दो से तीन गुना बढ़ सकता है, जिससे शुरुआती दौर में ही निदान करना महत्वपूर्ण हो जाता है। फिर भी, जागरूकता अभी भी कम है और विशेष स्लीप सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
इस बढ़ती स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता को देखते हुए, अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने हाल ही में एक समर्पित स्लीप डिसऑर्डर्स क्लिनिक लॉन्च किया है, जो नींद संबंधी विकारों के विस्तृत मूल्यांकन और उपचार की सुविधा प्रदान करता है। यह मल्टी-डिसिप्लिनरी क्लिनिक पल्मोनोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञों, सायकेट्रिस्ट और स्लीप टेक्नोलॉजिस्ट को एक साथ लाता है, ताकि इंटीग्रेटेड निदान, स्लीप स्टडीज, व्यक्तिगत उपचार योजनाएं और दीर्घकालिक फॉलो-अप प्रदान किया जा सके।
मरीज़ों के इस सम्मेलन में उन लोगों की प्रेरणादायक कहानियाँ भी प्रमुखता से साझा की गईं, जिन्होंने सही निदान मिलने से पहले वर्षों तक लगातार थकान, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, तेज खर्राटों और खराब नींद से संघर्ष किया था। उनके अनुभवों ने दिखाया कि समय पर उपचार कैसे संपूर्ण स्वास्थ्य, ऊर्जा के स्तर और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार कर सकता है।
एक्सपर्ट्स ने लोगों से आग्रह किया है कि वे जोर से खर्राटे लेने, नींद के दौरान सांस रुकने, दिन में अत्यधिक नींद आने, सुबह सिरदर्द और अनियंत्रित हायपरटेंशन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये पहले से मौजूद स्लीप डिसऑर्डर का संकेत हो सकते हैं। शुरुआती निदान और समय पर उपचार से गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।
अपोलो हॉस्पिटल्स, वेस्टर्न रीजन के रीजनल सीईओ, श्री अरुणेश पुनेथा ने कहा, “नींद कोई ऐशोआराम की बात नहीं है बल्कि यह अच्छे स्वास्थ्य का आधार है।” “जैसे लोग नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर की जांच करते हैं, वैसे ही उन्हें अपनी नींद की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। हमारा लक्ष्य न केवल नींद संबंधी विकारों का उपचार करना है, बल्कि जागरूकता बढ़ाना भी है ताकि अधिक लोग स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वस्थ नींद के महत्व को पहचान सकें।”
अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई को आशा है कि यह पहल अधिक लोगों को नींद संबंधी विकार की चेतावनी के संकेतों को पहचानने और समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे क्षेत्र की सबसे कम पहचानी जाने वाली स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक का समाधान करने में मदद मिलेगी।
अपोलो हॉस्पिटल्स के बारे में
अपोलो ने हेल्थकेयर में तब क्रांति ला दी जब डॉ. प्रताप रेड्डी ने 1983 में चेन्नई में पहला हॉस्पिटल खोला। आज, अपोलो दुनिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म है, जिसके 76 हॉस्पिटल्स में 10,400 से ज़्यादा बेड, 7,113 से ज़्यादा फार्मेसी, 308 क्लिनिक, 2,457 डायग्नोस्टिक सेंटर्स, और 800 से ज़्यादा टेलीमेडिसिन सेंटर हैं। यह दुनिया के अग्रणी कार्डिएक सेंटर्स में से एक है, जिसने 3,00,000 से अधिक एंजियोप्लास्टी और 2,00,000 सर्जरियाँ की हैं। अपोलो अनुसंधान और इनोवेशन में निवेश करना जारी रखे हुए है ताकि सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी, उपकरण और उपचार प्रोटोकॉल व्यवहार में लाए जा सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज़ों को दुनिया की सबसे अच्छी देखभाल मिल सके। अपोलो परिवार के 1,20,000 सदस्य बेहतरीन देखभाल देने और दुनिया को पहले से बेहतर बनाने के लिए समर्पित हैं।




