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स्थिरता और आधुनिक तकनीक से भारत के निर्माण क्षेत्र में क्रांति

'वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया २०२६' के १२वें संस्करण का मुंबई में शानदार आगाज

POSTED BY  : MRUNALI SAKPAL DATED ON 03/06/2026 ( 9004379946 )

मुंबई ( NHI.COM ) : मुंबई के बॉम्बे एक्जीबिशन सेंटर में ‘वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया २०२६’ के १२वें संस्करण की भव्य शुरुआत हुई। ‘इन्फॉर्म मार्केट्स इन इंडिया’ द्वारा ३ से ५ जून २०२६ के बीच आयोजित इस प्रदर्शनी में प्रीकास्ट टेक्नोलॉजीज, कंक्रीट, सीमेंट और ड्राई मोर्टार, निर्माण सुरक्षा समाधान, निर्माण उपकरण, कंस्ट्रक्शन केमिकल्स और एआई-आधारित सॉल्यूशंस जैसे क्षेत्रों के आधुनिक विकल्पों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटेरियल्स के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह ने सीमेंट उद्योग के भविष्य की दिशा पर प्रकाश डालते हुए कहा, “भारत का निर्माण क्षेत्र अभूतपूर्व विकास के लिए तैयार है। देश में सीमेंट उत्पादन आज के लगभग ५०० मिलियन टन से बढ़कर २०४७ तक २,१०० मिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है। इस विकास के साथ-साथ स्थिरता, कार्बन उत्सर्जन को कम करना और स्वदेशी निर्माण सामग्री का विकास समानांतर रूप से होना आवश्यक है। भविष्य का निर्माण न केवल पर्यावरण-अनुकूल होना चाहिए, बल्कि बाजार की प्रतिस्पर्धा में टिकने वाला और किफायती भी होना चाहिए।”

भारत में इस क्षेत्र की आर्थिक क्षमता की समीक्षा करते हुए ‘१लैटिस’ के वरिष्ठ निदेशक सुय्योग केळुसकर ने स्पष्ट किया, “देश वर्तमान में निर्माण क्षेत्र के एक बड़े चक्र से गुजर रहा है, जिससे इस क्षेत्र का सकल मूल्यवर्धन आज के ₹२८ ट्रिलियन से बढ़कर २०३५ तक ₹५८.८ ट्रिलियन होने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष २०२६ में ₹११.२१ लाख करोड़ का सरकारी कैपेक्स और ३१.२ मिलियन घरों की कमी को देखते हुए, उन्नत सामग्री और तकनीक-आधारित कार्यान्वयन आज के समय की मांग बन गया है।”

इसी तर्ज पर स्टार्टअप्स और नए विचारों को बढ़ावा देने के बारे में बात करते हुए ‘आई-हब गुजरात’ के सीईओ हिरण्मय महांता ने कहा, “पिछले दशक में भारत में लगभग २ लाख टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स खड़े हुए हैं। आई-हब गुजरात के माध्यम से हम शैक्षणिक इकोसिस्टम को उद्योगों से जोड़ रहे हैं, जिसके तहत अब तक ११,००० उद्योग और ३,२०० पेटेंट फाइल किए जा चुके हैं। ऐसे मंच स्टार्टअप्स और उद्योगपतियों को एक साथ लाकर नए विचारों को बाजार में उतारने में बड़ी मदद करते हैं।”

मुंबई के बुनियादी ढांचे के बारे में बात करते हुए मुंबई नगर निगम के सड़क विभाग के उप मुख्य अभियंता डॉ. विशाल ठोंबरे ने निगम के रणनीतिक निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “मुंबई में ३,००० से ३,५०० मिमी वार्षिक वर्षा और भारी यातायात का सामना करने के लिए निगम ने १९८९ से डामर की सड़कों को कंक्रीट में बदलना शुरू किया है। आज २,०३५ किमी के सड़क नेटवर्क में से १,४०० किमी सड़कें कंक्रीट की हो चुकी हैं, जिससे सड़कों का टिकाऊपन बढ़ा है और गड्ढों की समस्या का एक स्थायी समाधान निकला है।”

‘इन्फॉर्म मार्केट्स इन इंडिया’ के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने बाजार के भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा, “भारत का निर्माण उद्योग २०३० तक लगभग १.४ ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। परिवहन, हाई-स्पीड रेल और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर में निवेश के कारण यह वृद्धि हो रही है। जैसे-जैसे परियोजनाएं बड़ी और जटिल होती जा रही हैं, वैसे-वैसे उन्नत सामग्री और डिजिटल तकनीक की मांग भी बढ़ रही है। ‘वर्ल्ड ऑफ कंक्रीट इंडिया २०२६’ प्रदर्शनी देश के इस परिवर्तन और दीर्घकालिक विकास को गति देने वाली साबित होगी।”

इस प्रदर्शनी में अल्ट्राटेक सीमेंट, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, सिका इंडिया, एशियन पेंट्स, कंसाई नेरोलैक पेंट्स, क्रायसो सेंट-गोबेन जैसी अग्रणी भारतीय और वैश्विक कंपनियां निर्माण मूल्य श्रृंखला में अपने उन्नत उत्पाद और आधुनिक समाधान प्रदर्शित कर रही हैं।

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