Business

फिक्की लेजेंड्स सीरीज़, मुंबई में डॉ. आर. ए. माशेलकर का मंत्र – ‘More from Less for More’ ही भारत को बनाएगा किफायती उत्कृष्टता, समावेशी नवाचार और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व का केंद्र

डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समावेशी नवाचार ही विकसित भारत 2047 की आधारशिला होंगे : डॉ. आर. ए. माशेलकर

POSTED BY  : ANAGHA SAKPAL DATED ON 14/07/2026 (9004379946)

मुंबई (NHI.COM) : यदि भारत ऐसी प्रौद्योगिकियों और समाधानों का विकास करे जो विश्वस्तरीय होने के साथ-साथ किफायती हों और करोड़ों लोगों तक पहुंच सकें, तो डीप-टेक (Deep-Tech), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और समावेशी नवाचार (Inclusive Innovation) विकसित भारत 2047 के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकते हैं। यह विचार पद्म विभूषण, रॉयल सोसाइटी के फेलो तथा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के पूर्व महानिदेशक डॉ. रघुनाथ ए. माशेलकर ने मुंबई में आयोजित फिक्की लेजेंड्स सीरीज़ के अंतर्गत “Winning Through Innovation: Lessons for Industry and Society” विषय पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए।

उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवाचार विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए डॉ. माशेलकर ने कहा कि भारत को अब वैश्विक तकनीकों का केवल उपभोक्ता बनने के बजाय डीप साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सरकार-उद्योग की सशक्त साझेदारी के माध्यम से विश्वस्तरीय नवाचारों का सृजनकर्ता बनना होगा।

अपनी विश्वप्रसिद्ध अवधारणा “More from Less for More” पर प्रकाश डालते हुए डॉ. माशेलकर ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ा अवसर ऐसे उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के विकास का है, जो कम संसाधनों में बेहतर प्रदर्शन करें तथा करोड़ों लोगों के लिए किफायती और सुलभ हों। उन्होंने कहा कि अब नवाचार का मूल्यांकन केवल तकनीकी जटिलता या महंगे उत्पादों के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि वह समाज की सबसे बड़ी चुनौतियों का व्यापक स्तर पर समाधान किस प्रकार करता है। उत्कृष्टता, किफायत और समावेशिता—जो कभी एक-दूसरे के विपरीत मानी जाती थीं—आज भारत के नवाचार मॉडल की तीन प्रमुख आधारशिलाएं बननी चाहिए।

डॉ. माशेलकर ने कहा कि भारत ने सीमित संसाधनों के बावजूद अनेक क्रांतिकारी नवाचार विकसित कर यह सिद्ध किया है कि वैश्विक स्तर की तकनीकें कम लागत पर भी तैयार की जा सकती हैं। उन्होंने किफायती स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, एआई आधारित रोग पहचान और डीप-टेक स्टार्टअप्स का उल्लेख करते हुए कहा कि स्मार्टफोन आधारित टीबी जांच, थर्मल इमेजिंग से स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग, डिजिटल मातृ स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म और बिना रक्त निकाले एनीमिया की जांच जैसी तकनीकें “More from Less for More” की अवधारणा का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

भारतीय उद्योग जगत का आह्वान करते हुए डॉ. माशेलकर ने कहा कि अब समय केवल वैश्विक तकनीकों को अपनाने का नहीं, बल्कि दुनिया के लिए नई कार्य-पद्धतियां (Next Practices) विकसित करने का है। उन्होंने भारत की डिजिटल क्रांति, सस्ती डेटा सेवाओं, डीप-टेक उद्यमिता तथा ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक नेतृत्व की क्षमता प्रदर्शित की है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को “सह-चालक (Co-pilot), न कि स्वचालित चालक (Autopilot)” की भूमिका निभानी चाहिए, ताकि मानवीय विवेक, नैतिकता और संवेदनशीलता हमेशा तकनीकी विकास के केंद्र में बनी रहे।

डॉ. माशेलकर ने कहा कि नवाचार तभी फलता-फूलता है, जब सरकारें उच्च जोखिम वाले अनुसंधान और विघटनकारी (Disruptive) प्रौद्योगिकियों को सक्रिय समर्थन देती हैं। उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे मिशन आधारित कार्यक्रमों, साहसिक निवेश और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से शुरुआती तकनीकी जोखिम अपने ऊपर लें, ताकि स्टार्टअप्स और शोधकर्ता राष्ट्रीय महत्व की चुनौतियों पर काम कर सकें। उन्होंने कहा, “यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो हमें ऐसे ग्रैंड चैलेंज, डीप साइंस और परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों में निवेश करना होगा, जो समाज का भविष्य बदल सकें; केवल सबसे सस्ते उपलब्ध समाधान खरीदना पर्याप्त नहीं होगा।”

इस अवसर पर फिक्की के पूर्व अध्यक्ष तथा कनोरिया केमिकल्स एंड इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री आर. वी. कनोरिया ने कहा, “नवाचार अब केवल प्रयोगशालाओं या शोध संस्थानों तक सीमित नहीं है। आने वाले दशकों में यही भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता, तकनीकी नेतृत्व और समावेशी विकास की दिशा तय करेगा। उद्योग के सामने चुनौती केवल आकार बढ़ाने की नहीं, बल्कि ऐसे समाधान विकसित करने की है जो अधिक मूल्य सृजित करें और समाज के कहीं बड़े वर्ग को लाभान्वित करें।”

उन्होंने आगे कहा, “फिक्की अपने दूसरे शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। ऐसे समय भारत की यात्रा केवल औद्योगिक क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बौद्धिक संपदा, मौलिक प्रौद्योगिकियों और वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक नवाचारों के निर्माण की ओर अग्रसर होनी चाहिए। डॉ. माशेलकर का ‘More from Less for More’ दर्शन भारत को टिकाऊ, समावेशी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनाने का सशक्त मार्गदर्शन प्रदान करता है।”

फिक्की ड्रोन समिति के सह-अध्यक्ष तथा ideaForge के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अंकित मेहता ने कहा, “डॉ. माशेलकर की प्रेरणादायी यात्रा और उनका ‘More from Less for More’ दर्शन हमें यह सिखाता है कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य केवल चुनिंदा लोगों के लिए नवाचार करना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले जन-स्तरीय समाधान विकसित करना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों और सरकार के बीच मजबूत सहयोग अत्यंत आवश्यक होगा।”

फिक्की लेजेंड्स सीरीज़ के अंतर्गत आयोजित इस विशेष सत्र में देश के प्रमुख उद्योगपति, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्यमी, स्टार्टअप संस्थापक, शोधकर्ता तथा व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारत को ऐसी प्रौद्योगिकियों का विकास करना होगा जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल और सामाजिक रूप से समावेशी हों तथा भारत को किफायती उत्कृष्टता (Affordable Excellence) और डीप-टेक नवाचार के क्षेत्र में विश्व नेतृत्व दिला सकें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!